ट्रांस शारदा पार गांव बने टापू, नदी का बढ़ा जलस्तर बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
ऊपर से बारिश, नीचे शारदा का पानी - टापू बने गांव, संपर्क टूटा, प्रशासन बे-खबर
PNN24/ हजारा रिपोर्ट
ट्रांस शारदा क्षेत्र में बाढ़ का कहर: दो दर्जन गांव जलमग्न, घरों में 4 फीट तक पानी, हाहाकार
हजारा /पीलीभीत । लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और उत्तराखंड के पहाड़ों से छोड़े गए पानी के बाद शारदा नदी ने ट्रांस शारदा क्षेत्र में तबाही मचा दी है। उफनाई शारदा का पानी और बारिश के पानी ने मिलकर विकास खंड पूरनपुर के दो दर्जन से अधिक गांवों को जलमग्न कर दिया है। पूरा क्षेत्र टापू में तब्दील हो गया है और मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
👉 सड़कें डूबीं, घरों में घुसा पानी, जनजीवन अस्त-व्यस्त
भरतपुर के मजरे नेहरू नगर, लक्ष्मण नगर, अयोध्या नगर, शास्त्री नगर के साथ-साथ हजारा, सिद्धनगर सहित पूरे तराई क्षेत्र में बाढ़ का पानी भर गया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की सड़कों पर 2 से 3 फीट और घरों के अंदर 3 से 4 फीट तक पानी भरा हुआ है।
1 सितंबर से ही घरों में पानी भरा होने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों के पास बैठने, सोने और खाना बनाने तक की जगह नहीं बची है। शास्त्री नगर और नेहरू नगर के सैकड़ों परिवार अपना घर छोड़कर स्कूलों, ऊंचे टीलों और दूसरों के पक्के मकानों में शरण लेने को मजबूर हैं।
👉 "न चूल्हा जल रहा है, न बच्चों के लिए दूध है।
गांव में फंसे ग्रामीण रामप्रसाद, हरिओम और सुशीला देवी ने बताया कि "ऊपर से लगातार चार दिन से बारिश हो रही है और नीचे शारदा का पानी बढ़ रहा है। चारों तरफ जल ही जल है। न चूल्हा जल रहा है, न बच्चों के लिए दूध है।"
जलभराव के कारण घरों में रखा राशन और खाने-पीने की सामग्री खत्म हो गई है। सभी कच्चे-पक्के संपर्क मार्ग बंद होने से ग्रामीण बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। पशुओं के लिए चारे की भारी किल्लत पैदा हो गई है और कई कच्चे मकानों के गिरने का खतरा मंडरा रहा है।
👉 ग्रामीणों का आरोप नहीं पहुंचा मौके पर प्रशासन- ग्रामीणों में आक्रोश
इतनी बड़ी बाढ़ के बावजूद प्रशासन बे-खबर बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक राजस्व विभाग, बाढ़ खंड या तहसील प्रशासन का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचा है। न तो कोई राहत सामग्री बांटी गई है और न ही आने-जाने के लिए नाव की व्यवस्था की गई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में तत्काल नाव, पॉलीथीन, राशन किट, दवाइयां और पशुओं के लिए भूसे-चारे की व्यवस्था कराई जाए, ताकि लोगों को इस संकट से राहत मिल सके।
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